Tourists के लिए भी आकर्षक का केंद्र बने बुरास के पेड़
Tourist के अलावा कईं प्रर्यावरण प्रेमियों व स्थानीय लोगों को भी बुरास के साथ सेल्फी अथवा Photo Social Media पर share करते अथवा इन्हें पेड़ों से निकालते हुए देखा जा सकता है। हिमाचल के राज्य पुष्प बुरांश अथवा बुरास का वैज्ञानिक नाम Rhododendron arboreum है जिसका शाब्दिक अर्थ पेड़ पर खिलने वाला गुलाब है। बुरास न केवल देखने में आकर्षक है, बल्कि इसमें औषधीय गुणों के चलते कुछ लोगों के लिए यह आमदनी का जरिया भी बना हुआ है। उपमंडल संगड़ाह के कुछ किसान हर साल क्षेत्र के जंगलों से वन विभाग की अनुमति से बुरास निकालकर इसे उद्यान विभाग अथवा संबंधित उद्योगों को बेचते हैं। हृदय रोग, कैंसर, खून संबंधी बीमारियों तथा पेट के रोगों के लिए बुरांश का जूस अचूक औषधि समझा जाता है, जिसके चलते यह सामान्य जूस से काफी महंगा है। क्षेत्र में बुरास के उत्पादों से संबंधित कोई बड़ा उद्योग लगने की सूरत में यह सैंकड़ों किसान परिवारों की आय अथवा आजीविका का साधन बन सकता है। उद्यान विभाग में SMS के पद से सेवानिवृत्त हुए डॉ यूएस तोमर के अनुसार राजगढ़ में मौजूद जूस प्लांट में हर साल 20 से 40 क्विंटल बुरास के फूलों की जरूरत रहती है। साल 2021 में 15,17 व 19 मार्च को संगड़ाह के स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को Rohdo अथवा बुरास से तैयार होने वाले जूस, जैम तथा चटनी आदि बनाने संबंधी प्रशिक्षण फ्रूट एंड टेक्नोलॉजी संस्थान धौला-कुआं के विशेषज्ञ जसपाल सिंह द्वारा दिया गया था।
प्रदेश के पूर्व Governor महामहिम विश्वनाथ आर्लेकर ने भी संगड़ाह की महिलाओं के Rohdo Juice व Jam की सराहना की थी। पूर्व BDC मेलाराम शर्मा द्वारा उन्हे गत 12 अगस्त 2021 को उक्त product भेट किए गए थे। पंचायत समिति संगड़ाह ने यहां रोडोडेंड्रोन तथा फलों संबंधी उद्योग लगाए जाने की मांग भी सरकार से की थी, जो सिरे नहीं चढ़ी। समिति द्वारा संगड़ाह मे महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए निशुल्क दुकान भी उपलब्ध करवाई गई है। गौरतलब है कि, बुरास के जूस को खून, पेट, हृदय रोग तथा त्वचा संबंधी बीमारियों की आयुर्वेदिक दवा समझा जाता है। संगड़ाह विकास खंड के दो दर्जन स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा साल 2021 से रोडो जूस, जैम व स्क्वैश जैसे उत्पादक भी तैयार कर स्थानीय बाजार में बेचे जा रहे हैं, हालांकि सरकार की और से Marketing के लिए प्रोत्साहन न मिलने के चलते काफी महिलाएं हतोत्साहित होकर यह काम छोड़ चुकी है। पूर्व पंचायत समिति अध्यक्ष मेला राम शर्मा ने बताया कि, उन्होंने अपने कार्यकाल में न केवल SHG की महिलाओं को विशेषज्ञों से रोडो जूस जैम व स्क्वैश बनाने का प्रशिक्षण दिलवाया था, बल्कि हिम इरा के नाम से बिना किराए की दुकान भी उपलब्ध करवाई थी। BDO संगड़ाह नेहा नेगी रोडो प्रोडक्ट बना रहे SHG की संख्या को लेकर अधिकारिक जानकारी नहीं मिल सकी।
Social media पर viral हो रही है Rhododendron की खूबसूरत तस्वीरें
Self Help Groups द्वारा बनाया जा रहा है Rohdo Juice व Jam
सिरमौर जिला के उपमंडल संगड़ाह के समुद्र तल से 5500 से 11500 फुट की ऊंचाई वाले हिमालय जंगल इन दिनों बुरास अथवा Rhododendron के पेड़ों पर आई बहार से आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। क्षेत्र के सदाबहार हिमालई जंगलों में बुरास बहुतायत हिस्से में पाया जाता है तथा जंगल दूर से देखने पर रेड Rose Garden जैसे प्रतीत होते हैं। संगड़ाह से गत्ताधार, नौहराधार, हरिपुरधार व राजगढ़ की ओर जाने वाली सड़कों पर सैकड़ों हेक्टेयर भूमि में फैले बुरास के जंगलों में इन दिनों फिर से बाहर लौट आई है। इलाके में पड़ोसी राज्य पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ व दिल्ली आदि से आने वाले सैलानियों के लिए यह जंगल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।Tourist के अलावा कईं प्रर्यावरण प्रेमियों व स्थानीय लोगों को भी बुरास के साथ सेल्फी अथवा Photo Social Media पर share करते अथवा इन्हें पेड़ों से निकालते हुए देखा जा सकता है। हिमाचल के राज्य पुष्प बुरांश अथवा बुरास का वैज्ञानिक नाम Rhododendron arboreum है जिसका शाब्दिक अर्थ पेड़ पर खिलने वाला गुलाब है। बुरास न केवल देखने में आकर्षक है, बल्कि इसमें औषधीय गुणों के चलते कुछ लोगों के लिए यह आमदनी का जरिया भी बना हुआ है। उपमंडल संगड़ाह के कुछ किसान हर साल क्षेत्र के जंगलों से वन विभाग की अनुमति से बुरास निकालकर इसे उद्यान विभाग अथवा संबंधित उद्योगों को बेचते हैं। हृदय रोग, कैंसर, खून संबंधी बीमारियों तथा पेट के रोगों के लिए बुरांश का जूस अचूक औषधि समझा जाता है, जिसके चलते यह सामान्य जूस से काफी महंगा है। क्षेत्र में बुरास के उत्पादों से संबंधित कोई बड़ा उद्योग लगने की सूरत में यह सैंकड़ों किसान परिवारों की आय अथवा आजीविका का साधन बन सकता है। उद्यान विभाग में SMS के पद से सेवानिवृत्त हुए डॉ यूएस तोमर के अनुसार राजगढ़ में मौजूद जूस प्लांट में हर साल 20 से 40 क्विंटल बुरास के फूलों की जरूरत रहती है। साल 2021 में 15,17 व 19 मार्च को संगड़ाह के स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को Rohdo अथवा बुरास से तैयार होने वाले जूस, जैम तथा चटनी आदि बनाने संबंधी प्रशिक्षण फ्रूट एंड टेक्नोलॉजी संस्थान धौला-कुआं के विशेषज्ञ जसपाल सिंह द्वारा दिया गया था।
प्रदेश के पूर्व Governor महामहिम विश्वनाथ आर्लेकर ने भी संगड़ाह की महिलाओं के Rohdo Juice व Jam की सराहना की थी। पूर्व BDC मेलाराम शर्मा द्वारा उन्हे गत 12 अगस्त 2021 को उक्त product भेट किए गए थे। पंचायत समिति संगड़ाह ने यहां रोडोडेंड्रोन तथा फलों संबंधी उद्योग लगाए जाने की मांग भी सरकार से की थी, जो सिरे नहीं चढ़ी। समिति द्वारा संगड़ाह मे महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए निशुल्क दुकान भी उपलब्ध करवाई गई है। गौरतलब है कि, बुरास के जूस को खून, पेट, हृदय रोग तथा त्वचा संबंधी बीमारियों की आयुर्वेदिक दवा समझा जाता है। संगड़ाह विकास खंड के दो दर्जन स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा साल 2021 से रोडो जूस, जैम व स्क्वैश जैसे उत्पादक भी तैयार कर स्थानीय बाजार में बेचे जा रहे हैं, हालांकि सरकार की और से Marketing के लिए प्रोत्साहन न मिलने के चलते काफी महिलाएं हतोत्साहित होकर यह काम छोड़ चुकी है। पूर्व पंचायत समिति अध्यक्ष मेला राम शर्मा ने बताया कि, उन्होंने अपने कार्यकाल में न केवल SHG की महिलाओं को विशेषज्ञों से रोडो जूस जैम व स्क्वैश बनाने का प्रशिक्षण दिलवाया था, बल्कि हिम इरा के नाम से बिना किराए की दुकान भी उपलब्ध करवाई थी। BDO संगड़ाह नेहा नेगी रोडो प्रोडक्ट बना रहे SHG की संख्या को लेकर अधिकारिक जानकारी नहीं मिल सकी।




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